सीधे कंटेंट पर जाएँ
बटुए के कार्ड

जनाज़ा

الجنازة
Janāzah
इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

जनाज़ा · 08 में से 01
मौत और दफ़न
الْجَنَائِزُ
अल-जनाइज़
क्या करना है, तरतीब से, आख़िरी साँस से लेकर क़ब्र भरने तक। ज़रूरत पड़ने से पहले इसे अपने पास रखें।
2 · मरने वाला, और मौत की घड़ी
3 · मय्यत को ग़ुस्ल देना
4 · कफ़न
5 · नमाज़-ए-जनाज़ा
6 · मय्यत के लिए दुआ
7 · दफ़न
8 · सोग, और क़ब्र
फ़र्ज़-ए-किफ़ाया — पूरी जमाअत पर लाज़िम, जब तक कुछ लोग इसे अदा न कर दें। जहाँ ह · मा · शा · हं में इख़्तिलाफ़ है, वहाँ लिखा गया है।
02मरने वाला
शहादत की तलक़ीन
इसे उनके पास नर्मी से कहें ताकि वे भी कह लें। उन्हें हुक्म न दें और इसरार के साथ न दोहराएँ; जब वे कह लें, तो रुक जाएँ।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ
ला इलाह इल्लल्लाह
मुस्लिम · सहीह — “जिसके आख़िरी अल्फ़ाज़ ला इलाहा इल्लल्लाह हों, वह जन्नत में दाख़िल होगा।” अबू दाऊद · सहीह
मौत की घड़ी में
1 आँखें बंद कर दें और जबड़ा बाँध दें।
2 पूरे बदन को एक कपड़े से ढक दें।
3 ग़ुस्ल, नमाज़ और दफ़न में जल्दी करें।
4 उनके क़र्ज़ बिना देर किए अदा करें।
5 घरवालों और बाक़ी लोगों को इत्तिला दें।
आँखें बंद करते वक़्त कहा जाता है
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِفُلَانٍ وَارْفَعْ دَرَجَتَهُ فِي الْمَهْدِيِّينَ
अल्लाहुम्म-ग़्फ़िर लिफ़ुलानिन व-र्फ़अ दरजतहु फ़िल-मह्दिय्यीन
Allāhumma-ghfir li-[name] warfa‘ darajatahu fil-mahdiyyīn
ऐ अल्लाह, फ़लाँ को बख़्श दे और हिदायत पाए हुए लोगों में उसका दर्जा बुलंद फ़रमा।
मुस्लिम · सहीह — नबी ﷺ ने अबू सलमा ـؓ की वफ़ात पर यह कहा
03ग़ुस्ल
मय्यत को उसी की जिन्स के लोग ग़ुस्ल दें; मियाँ-बीवी एक-दूसरे को ग़ुस्ल दे सकते हैं। बदन को पर्दे में रखें और जो कुछ देखें उसे राज़ रखें।
1 पूरे वक़्त नाफ़ से घुटने तक ढके रखें।
2 पेट को नर्मी से दबाएँ ताकि जो कुछ बाक़ी हो निकल जाए; हाथ पर कपड़ा लपेटकर उसे धो डालें।
3 मय्यत को वुज़ू कराएँ, मुँह या नाक में पानी डाले बिना।
4 सिर और दाढ़ी को बेरी के पत्तों से, या साबुन से धोएँ।
5 दाईं तरफ़ धोएँ, फिर बाईं — ताक़ बार: तीन, पाँच या सात।
6 आख़िरी बार के धोने में काफ़ूर शामिल करें।
7 बदन को सुखा दें; औरत के बालों में कंघी की जाती है और उनकी तीन चोटियाँ गूँधकर उसके पीछे डाल दी जाती हैं।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह — ज़ैनब ـؓ के ग़ुस्ल के बारे में उम्म अतिय्या ـؓ की हदीस
जिसे ग़ुस्ल नहीं दिया जाता: जो जंग में मैदान में मारा गया हो — उसे उन्हीं कपड़ों में, उसके ख़ून समेत, दफ़न किया जाता है जिनमें उसकी मौत हुई, और शा और हं के नज़दीक उस पर नमाज़ नहीं पढ़ी जाती। चार महीने या उससे ज़्यादा का साक़ित हुआ बच्चा ग़ुस्ल दिया जाता है, उसका नाम रखा जाता है और उस पर नमाज़ पढ़ी जाती है।
बुख़ारी · सहीह; अबू दाऊद, नसाई · सहीह
04कफ़न
सादा सफ़ेद कपड़ा सुन्नत है। इसका ख़र्च क़र्ज़ों और वसीयतों से पहले तरके से अदा किया जाता है।
मर्द
तीन सफ़ेद चादरें, हर एक इतनी बड़ी कि पूरे बदन को लपेट ले। उन्हें एक के ऊपर एक बिछाएँ, मय्यत को उन पर रखें, और बारी-बारी हर चादर का पहले बायाँ किनारा लपेटें, फिर दायाँ।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह — नबी ﷺ को तीन सफ़ेद यमनी कपड़ों में कफ़न दिया गया, जिनमें न क़मीस थी न अमामा।
औरत
पाँच कपड़े — एक इज़ार, एक क़मीस, एक ओढ़नी, और लपेटने की दो चादरें।
अबू दाऊद · लैला बिन्त क़ानिफ़ ـؓ की रिवायत · मानी के लिहाज़ से हसन; सहाबा का अमल।
कफ़न को ख़ुशबू लगाएँ, सिवाय उसके जिसकी मौत एहराम में हुई हो — उसे न ख़ुशबू लगाई जाती है, न उसका सिर ढका जाता है, क्योंकि वह तल्बिया पढ़ता हुआ उठाया जाएगा।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह
सिरों को सिर के ऊपर और पैरों के नीचे बाँध दें; मय्यत को क़ब्र में रख देने के बाद उन्हें खोल दें।
05नमाज़-ए-जनाज़ा
सिर्फ़ खड़े होकर — न रुकू, न सजदा, न अज़ान और न इक़ामत। चार तकबीरें, फिर एक सलाम।
तकबीर 1 — हाथ उठाएँ, फिर अल-फ़ातिहा पढ़ें।
तकबीर 2 — नबी ﷺ पर दुरूद, जैसा तशह्हुद में है।
तकबीर 3 — मय्यत के लिए दुआ (कार्ड 06)।
तकबीर 4 — थोड़ी देर ठहरें, अपने लिए और मुसलमानों के लिए दुआ करें, फिर दाईं तरफ़ सलाम फेरें।
बुख़ारी · सहीह — इब्न अब्बास ـؓ ने अल-फ़ातिहा बुलंद आवाज़ से पढ़ी “ताकि लोग जान लें कि यह सुन्नत है।”
जहाँ फ़िक़्ही मज़हबों में इख़्तिलाफ़ है
अल-फ़ातिहा — शा और हं के नज़दीक वाजिब; ह इसकी जगह शुरू की सना पढ़ते हैं; मा इसे हम्द और दुआ तक महदूद रखते हैं।
हाथ उठाना — शा, हं और ह के नज़दीक हर तकबीर पर; मा के नज़दीक सिर्फ़ पहली पर।
सलाम — ह, मा और हं के नज़दीक दाईं तरफ़ एक; शा के नज़दीक दो जायज़ हैं।
इमाम मर्द के सिर के बराबर और औरत के दरमियान के बराबर खड़ा होता है। पीछे सफ़ें तीन या उससे ज़्यादा बनाना बेहतर है।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह — समुरा ـؓ की हदीस; तिर्मिज़ी · हसन
06दुआ
बालिग़ के लिए
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ وَاغْسِلْهُ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ وَنَقِّهِ مِنَ الْخَطَايَا كَمَا نَقَّيْتَ الثَّوْبَ الأَبْيَضَ مِنَ الدَّنَسِ وَأَبْدِلْهُ دَارًا خَيْرًا مِنْ دَارِهِ وَأَهْلاً خَيْرًا مِنْ أَهْلِهِ وَزَوْجًا خَيْرًا مِنْ زَوْجِهِ وَأَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ وَأَعِذْهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ أَوْ مِنْ عَذَابِ النَّارِ
अल्लाहुम्म-ग़्फ़िर लहु व-र्हम्हु व आफ़िहि व-अफ़ु अन्हु व अक्रिम नुज़ुलहु व वस्सिअ मुद्ख़लहु व-ग़्सिल्हु बिल-माइ वस-सल्जि वल-बरदि व नक़्क़िहि मिनल-ख़ताया कमा नक़्क़ैतस-सौबल-अब्यज़ मिनद-दनसि व अब्दिल्हु दारन ख़ैरन मिन दारिहि व अह्लन ख़ैरन मिन अह्लिहि व ज़ौजन ख़ैरन मिन ज़ौजिहि व अद्ख़िल्हुल-जन्नत व अइज़्हु मिन अज़ाबिल-क़ब्रि औ मिन अज़ाबिन-नार
पूरी रिवायत

Jubair b. Nufair says:I heard it from 'Auf b. Malik that the Prophet (ﷺ) said prayer on the dead body, and I remembered his prayer:" O Allah! forgive him, have mercy upon him, give him peace and absolve him. Receive him with honour and make his grave spacious; wash him with water, snow and hail. Cleanse him from faults as Thou wouldst cleanse a white garment from impurity. Requite him with an abode more excellent than his abode, with a family better than his family, and with a mate better than his mate. Admit him to the Garden, and protect him from the torment of the grave and the torment of the Fire." ('Auf bin Malik) said: I earnestly desired that I were this dead body

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 2232 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

Allāhumma-ghfir lahu warḥamh, wa ‘āfihi wa‘fu ‘anh, wa akrim nuzulah, wa wassi‘ mudkhalah, waghsilhu bil-mā’i wath-thalji wal-barad, wa naqqihi minal-khaṭāyā kamā naqqaytath-thawbal-abyaḍa minad-danas
ऐ अल्लाह, उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा; उसे आफ़ियत दे और उसे माफ़ कर दे; उसकी मेहमानी इज़्ज़त के साथ कर और उसके दाख़िल होने की जगह कुशादा कर दे; उसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे, और उसे गुनाहों से ऐसे पाक कर दे जैसे तूने सफ़ेद कपड़े को मैल से पाक किया।
मुस्लिम · सहीह — औफ़ इब्न मालिक ـؓ की हदीस। औरत के लिए हर जगह लहु को लहा से बदल दें।
बच्चे के लिए
اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ فَرَطًا وَذُخْرًا لِوَالِدَيْهِ، وَشَفِيعًا مُجَابًا
अल्लाहुम्म-जअल्हु फ़रतन व ज़ुख़्रन लिवालिदैह, व शफ़ीअन मुजाबन
Allāhumma-j‘alhu faraṭan wa dhukhran li-wālidayh, wa shafī‘an mujāban
ऐ अल्लाह, इसे अपने माँ-बाप के लिए आगे जाने वाला और ज़ख़ीरा बना दे, और ऐसा सिफ़ारिश करने वाला जिसकी सिफ़ारिश क़बूल की जाए।
हसन बसरी से मनक़ूल और सहाबा का अमल · बैहक़ी के अल्फ़ाज़।
07दफ़न
1 जनाज़े के साथ चलें, और जब तक उसे रख न दिया जाए, न बैठें।
2 क़िबले वाली दीवार में बग़ली ख़ाना (लहद) सीधी खाई से बेहतर है।
3 मय्यत को पैरों की तरफ़ से उतारें।
4 उसे दाईं करवट पर, क़िबला-रुख़ लिटाएँ, और कफ़न के बंद खोल दें।
5 लहद को कच्ची ईंटों से बंद करें, फिर क़ब्र भर दें।
6 हर हाज़िर शख़्स सिर की तरफ़ से तीन लप मिट्टी डाले।
7 क़ब्र को एक बालिश्त ऊँचा करें ताकि वह पहचानी जाए, और उस पर निशानी के लिए एक सादा पत्थर रखें।
उतारते वक़्त कहा जाता है
بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَىٰ سُنَّةِ رَسُولِ اللَّهِ
बिस्मिल्लाहि व अला सुन्नति रसूलिल्लाह
Bismillāhi wa ‘alā sunnati Rasūlillāh
अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल की मिल्लत पर।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह
क़ब्र भर जाने के बाद उसके पास कुछ देर ठहरें और उनके लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करें — “क्योंकि इस वक़्त उससे सवाल किया जा रहा है।”
अबू दाऊद · सहीह
08सोग और क़ब्र
मुसीबत के वक़्त कहा जाता है
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ، اللَّهُمَّ أْجُرْنِي فِي مُصِيبَتِي وَأَخْلِفْ لِي خَيْرًا مِنْهَا
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, अल्लाहुम्म अजुर्नी फ़ी मुसीबती व अख़्लिफ़ ली ख़ैरन मिन्हा
Innā lillāhi wa innā ilayhi rāji‘ūn, Allāhumma’jurnī fī muṣībatī wa akhlif lī khayran minhā
हम अल्लाह ही के हैं और हम उसी की तरफ़ लौटने वाले हैं। ऐ अल्लाह, मुझे मेरी मुसीबत में अज्र दे और मुझे इसके बदले इससे बेहतर अता फ़रमा।
मुस्लिम · सहीह
सोग
ज़्यादा से ज़्यादा तीन दिन — सिवाय बेवा के, जो चार महीने और दस दिन सोग करती है।
ग़म और आँसू जायज़ हैं; नौहा करना, चेहरा पीटना और कपड़े फाड़ना जायज़ नहीं।
पड़ोसियों को चाहिए कि घरवालों के लिए खाना तैयार करें।
बुख़ारी, मुस्लिम · सहीह; क़ुरआन 2:234; अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह
ज़ियारत — पहुँचने पर कहा जाता है
السَّلاَمُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الدِّيَارِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ لَلَاحِقُونَ أَسْأَلُ اللَّهَ لَنَا وَلَكُمْ الْعَافِيَةَ
अस-सलामु अलैकुम अह्लद-दियारि मिनल-मुअमिनीन वल-मुस्लिमीन व इन्ना इन शाअल्लाहु ललाहिक़ून असअलुल्लाह लना व लकुम अल-आफ़ियह
पूरी रिवायत

Sulaiman b. Buraida narrated on the authority of his father that the Messenger of Allah (ﷺ) used to teach them when they went out to the graveyard. One of the narrators used to say this in the narration transmitted on the authority of Abu Bakr:" Peace be upon the inhabitants of the city (i. e. graveyard)." In the hadith transmitted by Zuhair (the words are):" Peace be upon you, the inhabitants of the city, among the believers, and Muslims, and God willing we shall join you. I beg of Allah peace for us and for you

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 2257 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

As-salāmu ‘alaykum ahlad-diyāri minal-mu’minīna wal-muslimīn, wa innā in shā’Allāhu lalāḥiqūn
मुस्लिम · सहीह
सुन्नत में से नहीं: क़ब्रों पर इमारत बनाना या उन्हें पक्का करना, उन पर बैठना या चलना, उनकी तरफ़ रुख़ करके नमाज़ पढ़ना, और मुक़र्रर किए हुए तीसरे या चालीसवें दिन खाने के लिए इकट्ठा होना।
मुस्लिम · सहीह; इब्न माजा — जरीर इब्न अब्दुल्लाह ـؓ का अमल

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।

इस भाषा में लाइब्रेरी इंटरनेशनल एडिशन के एक ड्राफ़्ट तर्जुमे में पढ़ी जाती है। इसे मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसकी जाँच नहीं की है। स्रोत अरबी है; अंग्रेज़ी उसके साथ दिखाई जा सकती है। जहाँ कोई टाइटल क़ुरआन की आयत नक़ल करता है, वहाँ दिखाया गया मतलब एक पब्लिश हो चुके एडिशन, Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari (QuranEnc.com), के अल्फ़ाज़ हैं, ड्राफ़्ट नहीं।

यह टाइटल प्रिंट करें
इंटरनेशनल · अरबी · अंग्रेज़ी
लोकल · अरबी · বাংলা · अंग्रेज़ी

100% पर प्रिंट करें, “पेज के मुताबिक़” (fit to page) पर कभी नहीं, वरना कार्ड मुड़कर सही साइज़ के नहीं बनेंगे।

प्रिंट और शेयर करने के लिए मुफ़्त। बेचने के लिए नहीं।
इन्हीं लम्हों के लिए