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अज़कार

नमाज़ के बाद

सलाम के बाद से, तरतीब से।

इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

1इस्तिग़फ़ार
3×
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
अस्तग़्फ़िरुल्लाह
Astaghfirullāh
मैं अल्लाह से मग़फ़िरत माँगता हूँ।
मुस्लिम · सहीह
2अस-सलाम
1×
اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ، وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
अल्लाहुम्म अन्तस-सलाम, व मिन्कस-सलाम, तबारक्त या ज़ल-जलालि वल-इक्राम
Allāhumma Antas-Salām, wa minkas-salām, tabārakta yā Dhal-Jalāli wal-Ikrām
ऐ अल्लाह, तू ही सलाम है, और तुझी से सलामती है। तू बड़ी बरकत वाला है, ऐ जलाल और इकराम वाले।
मुस्लिम · सहीह — आप ﷺ सिर्फ़ उतनी देर क़िबले की तरफ़ रुख़ किए रहते जितनी देर इसमें लगती है, फिर लोगों की तरफ़ मुड़ जाते।
3तहलील और दुआ
1×
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ. اللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ
ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्द, व हुव अला कुल्लि शैइन क़दीर. अल्लाहुम्म ला मानिअ लिमा अअतैत, व ला मुअतिय लिमा मनअत, व ला यन्फ़उ ज़ल-जद्दि मिन्कल-जद्द
Lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, wa Huwa ‘alā kulli shay’in qadīr. Allāhumma lā māni‘a limā a‘ṭayt, wa lā mu‘ṭiya limā mana‘t, wa lā yanfa‘u dhal-jaddi minkal-jadd
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और हम्द उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ अल्लाह, जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं, और किसी नसीब वाले को उसका नसीब तेरे मुक़ाबले में नफ़ा नहीं देता।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह
4इब्न अज़-ज़ुबैर की तहलील
1×
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ، وَلَا نَعْبُدُ إِلَّا إِيَّاهُ، لَهُ النِّعْمَةُ وَلَهُ الْفَضْلُ وَلَهُ الثَّنَاءُ الْحَسَنُ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ
ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु व हुव अला कुल्लि शैइन क़दीर, ला हौल व ला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह, ला इलाह इल्लल्लाह, व ला नअबुदु इल्ला इय्याह, लहुन-निअमतु व लहुल-फ़ज़्लु व लहुस-सनाउल-हसन, ला इलाह इल्लल्लाहु मुख़्लिसीन लहुद-दीन व लौ करिहल-काफ़िरून
Lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd wa Huwa ‘alā kulli shay’in qadīr. Lā ḥawla wa lā quwwata illā billāh, lā ilāha illallāh, wa lā na‘budu illā iyyāh, lahun-ni‘matu wa lahul-faḍlu wa lahuth-thanā’ul-ḥasan, lā ilāha illallāhu mukhliṣīna lahud-dīna wa law karihal-kāfirūn
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और हम्द उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। न कोई ताक़त है न कोई क़ुव्वत, मगर अल्लाह ही की मदद से। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और हम उसके सिवा किसी की इबादत नहीं करते। हर नेमत उसी की है, हर फ़ज़्ल उसी का है, और हर अच्छी तारीफ़ उसी के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं — हम दीन को उसी के लिए ख़ालिस करते हैं, चाहे काफ़िरों को कितना ही नागवार हो।
मुस्लिम · सहीह — इब्न अज़-ज़ुबैर: आप ﷺ हर नमाज़ के बाद इन्हीं अल्फ़ाज़ से तहलील करते थे।
5सअद की पाँच चीज़ों से पनाह
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبُخْلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ، وَأَعُوذُ بِكَ أَنْ أُرَدَّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الدُّنْيَا، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ
अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिनल-बुख़्ल, व अऊज़ु बिक मिनल-जुब्न, व अऊज़ु बिक अन उरद्द इला अर्ज़लिल-उमुर, व अऊज़ु बिक मिन फ़ित्नतिद-दुन्या, व अऊज़ु बिक मिन अज़ाबिल-क़ब्र
Allāhumma innī a‘ūdhu bika minal-bukhl, wa a‘ūdhu bika minal-jubn, wa a‘ūdhu bika an uradda ilā ardhalil-‘umur, wa a‘ūdhu bika min fitnatid-dunyā, wa a‘ūdhu bika min ‘adhābil-qabr
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ कंजूसी से; बुज़दिली से; इस बात से कि मुझे सबसे निकम्मी उम्र की तरफ़ लौटा दिया जाए; दुनिया के फ़ितने से; और क़ब्र के अज़ाब से।
बुख़ारी · सहीह — सअद इब्न अबी वक़्क़ास: इनके साथ नमाज़ों के बाद (दुबुर अस-सलवात) पनाह माँगी जाती थी।
6मुआज़ की दुआ
1×
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَىٰ ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
अल्लाहुम्म अइन्नी अला ज़िक्रिक व शुक्रिक व हुस्नि इबादतिक
Allāhumma a‘innī ‘alā dhikrika wa shukrika wa ḥusni ‘ibādatik
ऐ अल्लाह, अपने ज़िक्र, अपने शुक्र और अपनी अच्छी इबादत पर मेरी मदद फ़रमा।
अबू दाऊद और नसाई · सहीह — आप ﷺ ने मुआज़ से फ़रमाया कि किसी नमाज़ के बाद इसे कभी न छोड़ें।
7तस्बीह — पूरे 100
33+33+33+1
سُبْحَانَ اللَّهِ · الْحَمْدُ لِلَّهِ · اللَّهُ أَكْبَرُ
सुब्हानल्लाह · अल-हम्दु लिल्लाह · अल्लाहु अक्बर
Subḥānallāh (33×) · Al-ḥamdu lillāh (33×) · Allāhu Akbar (33×) — then the tahlīl of no. 3 once, to complete 100
अल्लाह पाक है · सारी हम्द अल्लाह के लिए है · अल्लाह सबसे बड़ा है।
मुस्लिम · सहीह — गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं, चाहे वे समुंदर की झाग के बराबर हों।
8आयतुल-कुर्सी
2:255 · 1×
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
अल्लाहु ला इलाह इल्ला हुवल-हय्युल-क़य्यूमु ला तअख़ुज़ुहु सिनतुन व ला नौमुन लहु मा फ़िस-समावाति व मा फ़िल-अर्ज़ि मन ज़ल-लज़ी यश्फ़उ इन्दहु इल्ला बि-इज़्निहि यअलमु मा बैन ऐदीहिम व मा ख़ल्फ़हुम व ला युहीतून बिशैइन मिन इल्मिहि इल्ला बिमा शाअ वसिअ कुर्सिय्युहुस-समावाति वल-अर्ज़ व ला यऊदुहु हिफ़्ज़ुहुमा व हुवल-अलिय्युल-अज़ीम
Allāhu lā ilāha illā Huwal-Ḥayyul-Qayyūm. Lā ta’khudhuhū sinatun wa lā nawm. Lahū mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍ. Man dhal-ladhī yashfa‘u ‘indahū illā bi-idhnih. Ya‘lamu mā bayna aydīhim wa mā khalfahum, wa lā yuḥīṭūna bi-shay’im-min ‘ilmihī illā bimā shā’. Wasi‘a kursiyyuhus-samāwāti wal-arḍ, wa lā ya’ūduhū ḥifẓuhumā, wa Huwal-‘Aliyyul-‘Aẓīm.
अल्लाह (वह है कि) उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। (वह) जीवित है, हर चीज़ को सँभालने (क़ायम रखने) वाला है। न उसे कुछ ऊँघ पकड़ती है और न नींद। उसी का है जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है। कौन है, जो उसके पास उसकी अनुमति के बिना अनुशंसा (सिफ़ारिश) करे? वह जानता है जो कुछ उनके सामने और जो कुछ उनके पीछे है। और वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को (अपने ज्ञान से) नहीं घेर सकते, परंतु जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आकाशों और धरती को व्याप्त है और उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती। और वही सबसे ऊँचा, सबसे महान है।
नसाई और तबरानी · सहीह (इब्न हिब्बान, अल्बानी; कुछ ने हसन कहा है) — पढ़ने वाले और जन्नत के बीच मौत के सिवा कोई चीज़ हाइल नहीं।
9सूरह अल-इख़्लास
112 · 1× / 3×
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ
क़ुल हुवल्लाहु अहदुनिल्लाहुस-समदु लम यलिद व लम यूलद व लम यकुन लहु कुफ़ुवन अहद
Qul Huwallāhu Aḥad. Allāhuṣ-Ṣamad. Lam yalid wa lam yūlad. Wa lam yakun lahū kufuwan aḥad.
(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : वह अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है। न उसकी कोई संतान है और न वह किसी की संतान है। और न कोई उसका समकक्ष है।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई · सहीह — फ़ज्र और मग़रिब के बाद हर एक 3×।
10सूरह अल-फ़लक़
113 · 1× / 3×
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ وَمِنْ شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल-फ़लक़ि मिन शर्रि मा ख़लक़ व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब व मिन शर्रिन-नफ़्फ़ासाति फ़िल-उक़दि व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद
Qul a‘ūdhu bi-Rabbil-falaq. Min sharri mā khalaq. Wa min sharri ghāsiqin idhā waqab. Wa min sharrin-naffāthāti fil-‘uqad. Wa min sharri ḥāsidin idhā ḥasad.
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं सुबह के पालनहार की शरण लेता हूँ। उस चीज़ की बुराई से, जो उसने पैदा की। तथा अंधेरी रात की बुराई से, जब वह छा जाए। तथा गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से। तथा ईर्ष्या करने वाले की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।
ऊपर की तरह · सहीह
11सूरह अन-नास
114 · 1× / 3×
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ مَلِكِ النَّاسِ إِلَٰهِ النَّاسِ مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन-नासि मलिकिन-नासि इलाहिन-नासि मिन शर्रिल-वस्वासिल-ख़न्नासिल-लज़ी युवस्विसु फ़ी सुदूरिन-नासि मिनल-जिन्नति वन-नास
Qul a‘ūdhu bi-Rabbin-nās. Malikin-nās. Ilāhin-nās. Min sharril-waswāsil-khannās. Alladhī yuwaswisu fī ṣudūrin-nās. Minal-jinnati wan-nās.
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की। लोगों के बादशाह की। लोगों के सत्य पूज्य की। वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से। जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है। जिन्नों और इनसानों में से।
ऊपर की तरह · सहीह
हिस्सा 4 · नमाज़ के हिसाब से इज़ाफ़े
फ़ज्र और मग़रिब के बाद
10×
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْيِي وَيُمِيتُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्द, युह्यी व युमीत, व हुव अला कुल्लि शैइन क़दीर
Lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, yuḥyī wa yumīt, wa Huwa ‘alā kulli shay’in qadīr
…वही ज़िंदगी देता है और मौत देता है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
तिर्मिज़ी और अहमद · सहीह
फ़ज्र और मग़रिब के बाद
7×
اللَّهُمَّ أَجِرْنِي مِنَ النَّارِ
अल्लाहुम्म अजिर्नी मिनन-नार
Allāhumma ajirnī minan-nār
ऐ अल्लाह, मुझे आग से पनाह दे।
अबू दाऊद · सहीह (अल्बानी) — किसी से बात करने से पहले कही जाती है।
सिर्फ़ फ़ज्र के बाद
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक इल्मन नाफ़िअन, व रिज़्क़न तय्यिबन, व अमलन मुतक़ब्बलन
Allāhumma innī as’aluka ‘ilman nāfi‘an, wa rizqan ṭayyiban, wa ‘amalan mutaqabbalan
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे नफ़ा देने वाला इल्म, पाकीज़ा रोज़ी और क़बूल होने वाला अमल माँगता हूँ।
इब्न माजा · सहीह (अल्बानी)
वित्र के बाद
3×
سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْقُدُّوسِ — ثُمَّ — رَبِّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ
सुब्हानल-मलिकिल-क़ुद्दूस — सुम्म — रब्बिल-मलाइकति वर-रूह
Subḥānal-Malikil-Quddūs (3×) — raising and lengthening the voice on the third, then: Rabbil-malā’ikati war-rūḥ
पाक है बादशाह, निहायत मुक़द्दस — फ़रिश्तों और रूह का रब।
नसाई और अबू दाऊद · सहीह (अल्बानी) — वित्र का सलाम फेरने के बाद।

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।