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नमाज़ों के अज़कार

أذكار الصلاة
Adhkār of the Prayers
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यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

पूरी मुस्तनद तरतीब · अज़ान से सलाम तक · पाँच वक़्त की नमाज़ें · वित्र · जुमा · क़ुनूत · नफ़्ल और ख़ास मौक़ों की नमाज़ें
أَذْكَارُ الصَّلَاةِ
अज़्कारुस-सलाह
नीचे की हर चीज़ बुख़ारी, मुस्लिम, या सुनन की किसी किताब से है जिसे सहीह क़रार दिया गया है। पूरी हरकात वाली अरबी, तलफ़्फ़ुज़, मतलब और दर्जा; क़ुरआन का टेक्स्ट एक तस्दीक़शुदा, हरकात वाले मुसहफ़ से। सहीह रिवायतों में फ़र्क़ की गुंजाइश है — यह एक साबितशुदा तरतीब है।
नमाज़ · फ़र्ज़ से पहले · फ़र्ज़ · फ़र्ज़ के बाद · वक़्त
फ़ज्र · 2 सुन्नत · 2 फ़र्ज़ · — · सुबह-ए-सादिक़ → तुलू-ए-आफ़ताब
ज़ुहर · 4 सुन्नत · 4 फ़र्ज़ · 2 सुन्नत + 2 नफ़्ल · ज़वाल → सह-पहर
अस्र · 4 सुन्नत* · 4 फ़र्ज़ · — · सह-पहर → ग़ुरूब-ए-आफ़ताब
मग़रिब · — · 3 फ़र्ज़ · 2 सुन्नत + 2 नफ़्ल · ग़ुरूब-ए-आफ़ताब → शफ़क़ का ख़त्म होना
इशा · 4 सुन्नत* · 4 फ़र्ज़ · 2 सुन्नत + 2 नफ़्ल + 3 वित्र + 2 नफ़्ल · शफ़क़ का ख़त्म होना → सुबह-ए-सादिक़
जुमा · 4 सुन्नत · 2 फ़र्ज़ + ख़ुत्बा · 4 सुन्नत + 2 सुन्नत + 2 नफ़्ल · ज़ुहर की जगह
*ग़ैर-मुअक्कदा (इख़्तियारी)। बारह मुअक्कदा सुन्नत रकअतें — 4+2 ज़ुहर, 2 मग़रिब, 2 इशा, 2 फ़ज्र — जन्नत में एक घर दिलाती हैं (मुस्लिम)। हनफ़ी मज़हब में वित्र वाजिब है। रकअतों की तादाद हनफ़ी मज़हब के मुताबिक़ है।
हिस्सा 1 · नमाज़ की तरफ़ आना
अज़ान से तकबीर-ए-तहरीमा तक — वह ज़िक्र जो सबसे ज़्यादा छोड़ दिया जाता है, हालाँकि नमाज़ यहीं कमाई जाती है।
iअज़ान सुनने पर
फिर दुआ
اللَّهُمَّ رَبَّ هَٰذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ
अल्लाहुम्म रब्ब हाज़िहिद-दअवतित-ताम्मति वस-सलातिल-क़ाइमह, आति मुहम्मदनिल-वसीलत वल-फ़ज़ीलह, व-बअस्हु मक़ामन मह्मूदनिल-लज़ी वअद्तह
Allāhumma Rabba hādhihid-da‘watit-tāmmah waṣ-ṣalātil-qā’imah, āti Muḥammadanil-wasīlata wal-faḍīlah, wab‘ath-hu maqāman maḥmūdanil-ladhī wa‘adtah
ऐ अल्लाह, इस कामिल पुकार और क़ायम होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद को वसीला और फ़ज़ीलत अता फ़रमा, और उन्हें उस मक़ाम-ए-महमूद पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है।
बुख़ारी · सहीह — मुअज़्ज़िन के अल्फ़ाज़ दोहराएँ, फिर यह कहें; क़यामत के दिन शफ़ाअत नसीब होती है। हय्या अला… पर ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह कहें (मुस्लिम)।
iiअज़ान और इक़ामत के बीच
जितना चाहें
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ — ثُمَّ سَلْ مَا شِئْتَ
अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मद — सुम्म सल मा शिअत
Allāhumma ṣalli ‘alā Muḥammad — then ask for whatever you wish
नबी पर दुरूद भेजें, फिर माँगें। इस वक़्फ़े में दुआ रद्द नहीं की जाती।
अबू दाऊद और तिर्मिज़ी · सहीह — “अज़ान और इक़ामत के बीच की दुआ रद्द नहीं होती।”
iiiमस्जिद में दाख़िल होना · निकलना
1×
اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ — وَعِنْدَ الْخُرُوجِ — اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
अल्लाहुम्म-फ़्तह ली अब्वाब रह्मतिक — व इन्दल-ख़ुरूज — अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक मिन फ़ज़्लिक
Allāhumma iftaḥ lī abwāba raḥmatik — on leaving — Allāhumma innī as’aluka min faḍlik
ऐ अल्लाह, मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे — निकलते वक़्त: ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तेरा फ़ज़्ल माँगता हूँ।
मुस्लिम · सहीह — दाख़िल होते वक़्त पहले दायाँ पैर, निकलते वक़्त पहले बायाँ; बैठने से पहले तहिय्यतुल-मस्जिद की दो रकअतें (बुख़ारी)।
ivशुरुआती सना (तकबीर के बाद)
1×
سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ، وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ
सुब्हानक अल्लाहुम्म व बिहम्दिक, व तबारक-स्मुक, व तआला जद्दुक, व ला इलाह ग़ैरुक
Subḥānaka Allāhumma wa biḥamdik, wa tabārakasmuk, wa ta‘ālā jadduk, wa lā ilāha ghayruk
ऐ अल्लाह, तू पाक है और तेरी ही हम्द है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है, और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई · सहीह — तअव्वुज़ और अल-फ़ातिहा से पहले आहिस्ता पढ़ी जाती है।
vहर रकअत के अंदर
हर एक 3×
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ — سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ · رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ — سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَىٰ — رَبِّ اغْفِرْ لِي
सुब्हान रब्बियल-अज़ीम — समिअल्लाहु लिमन हमिदह · रब्बना लकल-हम्द — सुब्हान रब्बियल-अअला — रब्बि-ग़्फ़िर ली
Rukū‘: Subḥāna Rabbiyal-‘Aẓīm (3×) · rising: Sami‘allāhu liman ḥamidah — Rabbanā laka(l)-ḥamd · sujūd: Subḥāna Rabbiyal-A‘lā (3×) · between prostrations: Rabbighfir lī
पाक है मेरा रब, जो बड़ी अज़मत वाला है · अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी हम्द की — ऐ हमारे रब, तेरे ही लिए सारी हम्द है · पाक है मेरा रब, जो सबसे बुलंद है · ऐ मेरे रब, मुझे बख़्श दे।
बुख़ारी, मुस्लिम, अबू दाऊद · सहीह — सजदे की दुआ के क़बूल होने की सबसे ज़्यादा उम्मीद है (मुस्लिम)।
हिस्सा 2 · सलाम से पहले
आख़िरी क़ादा पूरा — तशह्हुद, दुरूद, फिर ये दो दुआएँ, जिनकी जगह नमाज़ के अंदर है, उसके बाद नहीं — यह वह जगह है जिसमें बहुत-से लोग ग़लती करते हैं।
αअत-तहिय्यात (तशह्हुद)
हर क़ादे में
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
अत-तहिय्यातु लिल्लाहि वस-सलवातु वत-तय्यिबात, अस-सलामु अलैक अय्युहन-नबिय्यु व रह्मतुल्लाहि व बरकातुह, अस-सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन, अश्हदु अन ला इलाह इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुह
At-taḥiyyātu lillāhi waṣ-ṣalawātu waṭ-ṭayyibāt, as-salāmu ‘alayka ayyuhan-Nabiyyu wa raḥmatullāhi wa barakātuh, as-salāmu ‘alaynā wa ‘alā ‘ibādillāhiṣ-ṣāliḥīn, ash-hadu an lā ilāha illallāh wa ash-hadu anna Muḥammadan ‘abduhū wa Rasūluh
तमाम ताज़ीमें, नमाज़ें और पाकीज़ा चीज़ें अल्लाह के लिए हैं। ऐ नबी, आप पर सलाम हो, और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें। सलाम हो हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और उसके रसूल हैं।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह — इब्न मसऊद; हनफ़ी अल्फ़ाज़। शाफ़ई/मालिकी मज़हब इब्न अब्बास और उमर के इससे मिलते-जुलते अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करते हैं, सब मुस्तनद हैं।
βदुरूद-ए-इब्राहीमी
आख़िरी क़ादा
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ. اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैत अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम, इन्नक हमीदुन मजीद. अल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद, कमा बारक्त अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम, इन्नक हमीदुन मजीद
Allāhumma ṣalli ‘alā Muḥammadin wa ‘alā āli Muḥammad, kamā ṣallayta ‘alā Ibrāhīma wa ‘alā āli Ibrāhīm, innaka Ḥamīdun Majīd. Allāhumma bārik ‘alā Muḥammadin wa ‘alā āli Muḥammad, kamā bārakta ‘alā Ibrāhīma wa ‘alā āli Ibrāhīm, innaka Ḥamīdun Majīd
ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद की आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम की आल पर रहमत नाज़िल फ़रमाई — बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमाई — बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बुज़ुर्गी वाला है।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह — वह जवाब जो आप ﷺ ने तब दिया जब पूछा गया कि आप पर दुरूद कैसे भेजा जाए। फिर नीचे की दो दुआएँ, फिर सलाम।
Aचार चीज़ों से पनाह
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ
अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिन अज़ाबि जहन्नम, व मिन अज़ाबिल-क़ब्र, व मिन फ़ित्नतिल-मह्या वल-ममात, व मिन शर्रि फ़ित्नतिल-मसीहिद-दज्जाल
Allāhumma innī a‘ūdhu bika min ‘adhābi jahannam, wa min ‘adhābil-qabr, wa min fitnatil-maḥyā wal-mamāt, wa min sharri fitnatil-Masīḥid-Dajjāl
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ जहन्नम के अज़ाब से, क़ब्र के अज़ाब से, ज़िंदगी और मौत के फ़ितने से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने की बुराई से।
मुस्लिम · सहीह — हुक्म दिया गया: “जब तुममें से कोई आख़िरी तशह्हुद से फ़ारिग़ हो, तो चार चीज़ों से पनाह माँगे।”
Bअबू बक्र की दुआ
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا، وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ، فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي، إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
अल्लाहुम्म इन्नी ज़लम्तु नफ़्सी ज़ुल्मन कसीरन, व ला यग़्फ़िरुज़-ज़ुनूब इल्ला अन्त, फ़-ग़्फ़िर ली मग़्फ़िरतन मिन इन्दिक व-र्हम्नी, इन्नक अन्तल-ग़फ़ूरुर-रहीम
Allāhumma innī ẓalamtu nafsī ẓulman kathīran, wa lā yaghfirudh-dhunūba illā Anta, faghfir lī maghfiratan min ‘indika warḥamnī, innaka Antal-Ghafūrur-Raḥīm
ऐ अल्लाह, मैंने अपनी जान पर बहुत ज़ुल्म किया है, और तेरे सिवा कोई गुनाहों को नहीं बख़्शता। तो अपनी तरफ़ की मग़फ़िरत से मुझे बख़्श दे, और मुझ पर रहम फ़रमा। बेशक तू ही बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम वाला है।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह — अबू बक्र को सिखाई गई जब उन्होंने अपनी नमाज़ में पढ़ने के लिए एक दुआ माँगी।
हिस्सा 3 · हर फ़र्ज़ के बाद
1इस्तिग़फ़ार
3×
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
अस्तग़्फ़िरुल्लाह
Astaghfirullāh
मैं अल्लाह से मग़फ़िरत माँगता हूँ।
मुस्लिम · सहीह
2अस-सलाम
1×
اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ، وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
अल्लाहुम्म अन्तस-सलाम, व मिन्कस-सलाम, तबारक्त या ज़ल-जलालि वल-इक्राम
Allāhumma Antas-Salām, wa minkas-salām, tabārakta yā Dhal-Jalāli wal-Ikrām
ऐ अल्लाह, तू ही सलाम है, और तुझी से सलामती है। तू बड़ी बरकत वाला है, ऐ जलाल और इकराम वाले।
मुस्लिम · सहीह — आप ﷺ सिर्फ़ उतनी देर क़िबले की तरफ़ रुख़ किए रहते जितनी देर इसमें लगती है, फिर लोगों की तरफ़ मुड़ जाते।
3तहलील और दुआ
1×
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ. اللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ
ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्द, व हुव अला कुल्लि शैइन क़दीर. अल्लाहुम्म ला मानिअ लिमा अअतैत, व ला मुअतिय लिमा मनअत, व ला यन्फ़उ ज़ल-जद्दि मिन्कल-जद्द
Lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, wa Huwa ‘alā kulli shay’in qadīr. Allāhumma lā māni‘a limā a‘ṭayt, wa lā mu‘ṭiya limā mana‘t, wa lā yanfa‘u dhal-jaddi minkal-jadd
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और हम्द उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ अल्लाह, जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं, और किसी नसीब वाले को उसका नसीब तेरे मुक़ाबले में नफ़ा नहीं देता।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह
4इब्न अज़-ज़ुबैर की तहलील
1×
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ، وَلَا نَعْبُدُ إِلَّا إِيَّاهُ، لَهُ النِّعْمَةُ وَلَهُ الْفَضْلُ وَلَهُ الثَّنَاءُ الْحَسَنُ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ
ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु व हुव अला कुल्लि शैइन क़दीर, ला हौल व ला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह, ला इलाह इल्लल्लाह, व ला नअबुदु इल्ला इय्याह, लहुन-निअमतु व लहुल-फ़ज़्लु व लहुस-सनाउल-हसन, ला इलाह इल्लल्लाहु मुख़्लिसीन लहुद-दीन व लौ करिहल-काफ़िरून
Lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd wa Huwa ‘alā kulli shay’in qadīr. Lā ḥawla wa lā quwwata illā billāh, lā ilāha illallāh, wa lā na‘budu illā iyyāh, lahun-ni‘matu wa lahul-faḍlu wa lahuth-thanā’ul-ḥasan, lā ilāha illallāhu mukhliṣīna lahud-dīna wa law karihal-kāfirūn
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और हम्द उसी के लिए है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। न कोई ताक़त है न कोई क़ुव्वत, मगर अल्लाह ही की मदद से। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और हम उसके सिवा किसी की इबादत नहीं करते। हर नेमत उसी की है, हर फ़ज़्ल उसी का है, और हर अच्छी तारीफ़ उसी के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं — हम दीन को उसी के लिए ख़ालिस करते हैं, चाहे काफ़िरों को कितना ही नागवार हो।
मुस्लिम · सहीह — इब्न अज़-ज़ुबैर: आप ﷺ हर नमाज़ के बाद इन्हीं अल्फ़ाज़ से तहलील करते थे।
5सअद की पाँच चीज़ों से पनाह
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبُخْلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ، وَأَعُوذُ بِكَ أَنْ أُرَدَّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الدُّنْيَا، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ
अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिनल-बुख़्ल, व अऊज़ु बिक मिनल-जुब्न, व अऊज़ु बिक अन उरद्द इला अर्ज़लिल-उमुर, व अऊज़ु बिक मिन फ़ित्नतिद-दुन्या, व अऊज़ु बिक मिन अज़ाबिल-क़ब्र
Allāhumma innī a‘ūdhu bika minal-bukhl, wa a‘ūdhu bika minal-jubn, wa a‘ūdhu bika an uradda ilā ardhalil-‘umur, wa a‘ūdhu bika min fitnatid-dunyā, wa a‘ūdhu bika min ‘adhābil-qabr
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ कंजूसी से; बुज़दिली से; इस बात से कि मुझे सबसे निकम्मी उम्र की तरफ़ लौटा दिया जाए; दुनिया के फ़ितने से; और क़ब्र के अज़ाब से।
बुख़ारी · सहीह — सअद इब्न अबी वक़्क़ास: इनके साथ नमाज़ों के बाद (दुबुर अस-सलवात) पनाह माँगी जाती थी।
6मुआज़ की दुआ
1×
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَىٰ ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ
अल्लाहुम्म अइन्नी अला ज़िक्रिक व शुक्रिक व हुस्नि इबादतिक
Allāhumma a‘innī ‘alā dhikrika wa shukrika wa ḥusni ‘ibādatik
ऐ अल्लाह, अपने ज़िक्र, अपने शुक्र और अपनी अच्छी इबादत पर मेरी मदद फ़रमा।
अबू दाऊद और नसाई · सहीह — आप ﷺ ने मुआज़ से फ़रमाया कि किसी नमाज़ के बाद इसे कभी न छोड़ें।
7तस्बीह — पूरे 100
33+33+33+1
سُبْحَانَ اللَّهِ · الْحَمْدُ لِلَّهِ · اللَّهُ أَكْبَرُ
सुब्हानल्लाह · अल-हम्दु लिल्लाह · अल्लाहु अक्बर
Subḥānallāh (33×) · Al-ḥamdu lillāh (33×) · Allāhu Akbar (33×) — then the tahlīl of no. 3 once, to complete 100
अल्लाह पाक है · सारी हम्द अल्लाह के लिए है · अल्लाह सबसे बड़ा है।
मुस्लिम · सहीह — गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं, चाहे वे समुंदर की झाग के बराबर हों।
8आयतुल-कुर्सी
2:255 · 1×
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
अल्लाहु ला इलाह इल्ला हुवल-हय्युल-क़य्यूमु ला तअख़ुज़ुहु सिनतुन व ला नौमुन लहु मा फ़िस-समावाति व मा फ़िल-अर्ज़ि मन ज़ल-लज़ी यश्फ़उ इन्दहु इल्ला बि-इज़्निहि यअलमु मा बैन ऐदीहिम व मा ख़ल्फ़हुम व ला युहीतून बिशैइन मिन इल्मिहि इल्ला बिमा शाअ वसिअ कुर्सिय्युहुस-समावाति वल-अर्ज़ व ला यऊदुहु हिफ़्ज़ुहुमा व हुवल-अलिय्युल-अज़ीम
Allāhu lā ilāha illā Huwal-Ḥayyul-Qayyūm. Lā ta’khudhuhū sinatun wa lā nawm. Lahū mā fis-samāwāti wa mā fil-arḍ. Man dhal-ladhī yashfa‘u ‘indahū illā bi-idhnih. Ya‘lamu mā bayna aydīhim wa mā khalfahum, wa lā yuḥīṭūna bi-shay’im-min ‘ilmihī illā bimā shā’. Wasi‘a kursiyyuhus-samāwāti wal-arḍ, wa lā ya’ūduhū ḥifẓuhumā, wa Huwal-‘Aliyyul-‘Aẓīm.
अल्लाह (वह है कि) उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। (वह) जीवित है, हर चीज़ को सँभालने (क़ायम रखने) वाला है। न उसे कुछ ऊँघ पकड़ती है और न नींद। उसी का है जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है। कौन है, जो उसके पास उसकी अनुमति के बिना अनुशंसा (सिफ़ारिश) करे? वह जानता है जो कुछ उनके सामने और जो कुछ उनके पीछे है। और वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को (अपने ज्ञान से) नहीं घेर सकते, परंतु जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आकाशों और धरती को व्याप्त है और उन दोनों की रक्षा उसे नहीं थकाती। और वही सबसे ऊँचा, सबसे महान है।
नसाई और तबरानी · सहीह (इब्न हिब्बान, अल्बानी; कुछ ने हसन कहा है) — पढ़ने वाले और जन्नत के बीच मौत के सिवा कोई चीज़ हाइल नहीं।
9सूरह अल-इख़्लास
112 · 1× / 3×
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ
क़ुल हुवल्लाहु अहदुनिल्लाहुस-समदु लम यलिद व लम यूलद व लम यकुन लहु कुफ़ुवन अहद
Qul Huwallāhu Aḥad. Allāhuṣ-Ṣamad. Lam yalid wa lam yūlad. Wa lam yakun lahū kufuwan aḥad.
(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : वह अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है। न उसकी कोई संतान है और न वह किसी की संतान है। और न कोई उसका समकक्ष है।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई · सहीह — फ़ज्र और मग़रिब के बाद हर एक 3×।
10सूरह अल-फ़लक़
113 · 1× / 3×
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِنْ شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ وَمِنْ شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल-फ़लक़ि मिन शर्रि मा ख़लक़ व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब व मिन शर्रिन-नफ़्फ़ासाति फ़िल-उक़दि व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद
Qul a‘ūdhu bi-Rabbil-falaq. Min sharri mā khalaq. Wa min sharri ghāsiqin idhā waqab. Wa min sharrin-naffāthāti fil-‘uqad. Wa min sharri ḥāsidin idhā ḥasad.
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं सुबह के पालनहार की शरण लेता हूँ। उस चीज़ की बुराई से, जो उसने पैदा की। तथा अंधेरी रात की बुराई से, जब वह छा जाए। तथा गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से। तथा ईर्ष्या करने वाले की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।
ऊपर की तरह · सहीह
11सूरह अन-नास
114 · 1× / 3×
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ مَلِكِ النَّاسِ إِلَٰهِ النَّاسِ مِنْ شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ
क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन-नासि मलिकिन-नासि इलाहिन-नासि मिन शर्रिल-वस्वासिल-ख़न्नासिल-लज़ी युवस्विसु फ़ी सुदूरिन-नासि मिनल-जिन्नति वन-नास
Qul a‘ūdhu bi-Rabbin-nās. Malikin-nās. Ilāhin-nās. Min sharril-waswāsil-khannās. Alladhī yuwaswisu fī ṣudūrin-nās. Minal-jinnati wan-nās.
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की। लोगों के बादशाह की। लोगों के सत्य पूज्य की। वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से। जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है। जिन्नों और इनसानों में से।
ऊपर की तरह · सहीह
हिस्सा 4 · नमाज़ के हिसाब से इज़ाफ़े
फ़ज्र और मग़रिब के बाद
10×
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْيِي وَيُمِيتُ، وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ला इलाह इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीक लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्द, युह्यी व युमीत, व हुव अला कुल्लि शैइन क़दीर
Lā ilāha illallāhu waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku wa lahul-ḥamd, yuḥyī wa yumīt, wa Huwa ‘alā kulli shay’in qadīr
…वही ज़िंदगी देता है और मौत देता है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
तिर्मिज़ी और अहमद · सहीह
फ़ज्र और मग़रिब के बाद
7×
اللَّهُمَّ أَجِرْنِي مِنَ النَّارِ
अल्लाहुम्म अजिर्नी मिनन-नार
Allāhumma ajirnī minan-nār
ऐ अल्लाह, मुझे आग से पनाह दे।
अबू दाऊद · सहीह (अल्बानी) — किसी से बात करने से पहले कही जाती है।
सिर्फ़ फ़ज्र के बाद
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक इल्मन नाफ़िअन, व रिज़्क़न तय्यिबन, व अमलन मुतक़ब्बलन
Allāhumma innī as’aluka ‘ilman nāfi‘an, wa rizqan ṭayyiban, wa ‘amalan mutaqabbalan
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे नफ़ा देने वाला इल्म, पाकीज़ा रोज़ी और क़बूल होने वाला अमल माँगता हूँ।
इब्न माजा · सहीह (अल्बानी)
वित्र के बाद
3×
سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْقُدُّوسِ — ثُمَّ — رَبِّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ
सुब्हानल-मलिकिल-क़ुद्दूस — सुम्म — रब्बिल-मलाइकति वर-रूह
Subḥānal-Malikil-Quddūs (3×) — raising and lengthening the voice on the third, then: Rabbil-malā’ikati war-rūḥ
पाक है बादशाह, निहायत मुक़द्दस — फ़रिश्तों और रूह का रब।
नसाई और अबू दाऊद · सहीह (अल्बानी) — वित्र का सलाम फेरने के बाद।
जुमे का दिन — दिन भर
कोई मुक़र्रर तादाद नहीं
اللَّهُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ عَلَىٰ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ
अल्लाहुम्म सल्लि व सल्लिम अला नबिय्यिना मुहम्मद
Allāhumma ṣalli wa sallim ‘alā Nabiyyinā Muḥammad
ऐ अल्लाह, हमारे नबी मुहम्मद पर दुरूद और सलाम भेज।
अबू दाऊद और नसाई · हसन/सहीह — “जुमे के दिन मुझ पर कसरत से दुरूद भेजो।”
हिस्सा 5 · वित्र में क़ुनूत
दुआ-ए-क़ुनूत (अल-हसन इब्न अली)
1×
اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَ، وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَ، وَتَوَلَّنِي فِيمَنْ تَوَلَّيْتَ، وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَ، وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَ، إِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَىٰ عَلَيْكَ، وَإِنَّهُ لَا يَذِلُّ مَنْ وَالَيْتَ، تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَ
अल्लाहुम्म-ह्दिनी फ़ीमन हदैत, व आफ़िनी फ़ीमन आफ़ैत, व तवल्लनी फ़ीमन तवल्लैत, व बारिक ली फ़ीमा अअतैत, व क़िनी शर्र मा क़ज़ैत, इन्नक तक़्ज़ी व ला युक़्ज़ा अलैक, व इन्नहु ला यज़िल्लु मन वालैत, तबारक्त रब्बना व तआलैत
Allāhummahdinī fīman hadayt, wa ‘āfinī fīman ‘āfayt, wa tawallanī fīman tawallayt, wa bārik lī fīmā a‘ṭayt, wa qinī sharra mā qaḍayt, innaka taqḍī wa lā yuqḍā ‘alayk, wa innahū lā yadhillu man wālayt, tabārakta Rabbanā wa ta‘ālayt
ऐ अल्लाह, मुझे हिदायत दे उन लोगों में जिन्हें तूने हिदायत दी, मुझे आफ़ियत दे उन लोगों में जिन्हें तूने आफ़ियत दी, मेरी सरपरस्ती फ़रमा उन लोगों में जिनकी तूने सरपरस्ती फ़रमाई, जो कुछ तूने मुझे दिया है उसमें बरकत दे, और जो तूने फ़ैसला किया है उसकी बुराई से मुझे बचा। बेशक तू ही फ़ैसला करता है और तेरे ख़िलाफ़ कोई फ़ैसला नहीं किया जाता। जिसका तू दोस्त हो, वह कभी ज़लील नहीं होता। ऐ हमारे रब, तू बरकत वाला और बुलंद है।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई · सहीह — नबी ﷺ ने अल-हसन को वित्र के क़ुनूत के लिए सिखाई।
उमर का क़ुनूत (हनफ़ी अमल)
1×
اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ، وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ، وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ يَفْجُرُكَ. اللَّهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ، وَلَكَ نُصَلِّي وَنَسْجُدُ، وَإِلَيْكَ نَسْعَىٰ وَنَحْفِدُ، وَنَرْجُو رَحْمَتَكَ وَنَخْشَىٰ عَذَابَكَ، إِنَّ عَذَابَكَ بِالْكَافِرِينَ مُلْحِقٌ
अल्लाहुम्म इन्ना नस्तईनुक व नस्तग़्फ़िरुक व नुअमिनु बिक व नतवक्कलु अलैक व नुस्नी अलैकल-ख़ैर, व नश्कुरुक व ला नक्फ़ुरुक, व नख़्लउ व नत्रुकु मन यफ़्जुरुक. अल्लाहुम्म इय्याक नअबुद, व लक नुसल्ली व नस्जुद, व इलैक नसआ व नह्फ़िद, व नर्जू रह्मतक व नख़्शा अज़ाबक, इन्न अज़ाबक बिल-काफ़िरीन मुल्हिक़
Allāhumma innā nasta‘īnuka wa nastaghfiruka wa nu’minu bika wa natawakkalu ‘alayka wa nuthnī ‘alaykal-khayr, wa nashkuruka wa lā nakfuruk, wa nakhla‘u wa natruku man yafjuruk. Allāhumma iyyāka na‘bud, wa laka nuṣallī wa nasjud, wa ilayka nas‘ā wa naḥfid, wa narjū raḥmataka wa nakhshā ‘adhābak, inna ‘adhābaka bil-kāfirīna mulḥiq
ऐ अल्लाह, हम तुझसे मदद माँगते हैं और तुझसे मग़फ़िरत चाहते हैं; हम तुझ पर ईमान लाते हैं और तुझ पर भरोसा करते हैं; हम तेरी अच्छी तारीफ़ करते हैं और तेरा शुक्र अदा करते हैं, और तेरी नाशुक्री नहीं करते; और जो तेरी नाफ़रमानी करे, हम उससे अलग हो जाते और उसे छोड़ देते हैं। ऐ अल्लाह, हम तेरी ही इबादत करते हैं; तेरे ही लिए नमाज़ पढ़ते और सजदा करते हैं; तेरी ही तरफ़ दौड़ते और लपकते हैं। हम तेरी रहमत की उम्मीद रखते हैं और तेरे अज़ाब से डरते हैं — बेशक तेरा अज़ाब काफ़िरों को पहुँचकर रहने वाला है।
उमर और उबय्य का असर (इब्न अबी शैबा, बैहक़ी) · सहाबा की रिवायत के तौर पर साबित, नबवी हदीस नहीं — हनफ़ी क़ुनूत; बहुत-से लोग ऊपर वाली दुआ भी साथ मिला लेते हैं।
हिस्सा 6 · दूसरी नमाज़ें
फ़र्ज़ के अलावा: क्या पढ़ा जाता है, कितनी रकअतें, और कब। हिस्सा 2–3 फ़र्ज़ से मुताल्लिक़ हैं; नफ़्ल नमाज़ें ज़िक्र और दुआ पर ख़त्म की जाती हैं, जिनके कोई मुक़र्रर अल्फ़ाज़ नहीं, सिवाय इसके कि कहीं बताया गया हो।
तहिय्यतुल-मस्जिद · 2 · दाख़िल होने पर, बैठने से पहले · बुख़ारी, मुस्लिम
वुज़ू के बाद · 2 · किसी भी वक़्त, हुज़ूर-ए-क़ल्ब के साथ · मुस्लिम
इशराक़ / चाश्त · 2–12 · सूरज के एक नेज़े के बराबर बुलंद होने से → ज़वाल से पहले तक · तिर्मिज़ी (हसन), मुस्लिम
तहज्जुद / क़ियाम · 2–11 · रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा, सोने के बाद · बुख़ारी, मुस्लिम
तरावीह · 8–20 · रमज़ान, इशा के बाद, वित्र से पहले · बुख़ारी
इस्तिख़ारा · 2 · किसी भी अहम फ़ैसले से पहले · बुख़ारी
तौबा · 2 · गुनाह के बाद, फिर मग़फ़िरत माँगें · अबू दाऊद (सहीह)
सलातुल-हाजत · 2 · किसी सख़्त ज़रूरत के वक़्त, फिर दुरूद और दुआ · तिर्मिज़ी
जनाज़ा · 4 तकबीरें · खड़े होकर, न रुकू न सजदा · बुख़ारी, मुस्लिम
ईद · 2 · तुलू-ए-आफ़ताब → ज़वाल, ज़ाइद तकबीरें, बाद में ख़ुत्बा · बुख़ारी
कुसूफ़ / ख़ुसूफ़ · 2 · सूरज या चाँद ग्रहण के दौरान, लंबा क़ियाम · बुख़ारी
इस्तिस्क़ा · 2 · बारिश माँगने के लिए, ख़ुत्बे और चादर पलटने के साथ · बुख़ारी
ख़ौफ़ · क़स्र · ख़तरे या जंग में, बारी-बारी · बुख़ारी, मुस्लिम
क़स्र (सफ़र) · 4 → 2 · सफ़र में ज़ुहर, अस्र, इशा क़स्र की जाती हैं · बुख़ारी, मुस्लिम
दुआ-ए-इस्तिख़ारा
2 रकअतों के बाद
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ، وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ. اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَٰذَا الْأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّهُ شَرٌّ لِي فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ، وَاقْدُرْ لِيَ الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ، ثُمَّ رَضِّنِي بِهِ
अल्लाहुम्म इन्नी अस्तख़ीरुक बिइल्मिक, व अस्तक़्दिरुक बिक़ुद्रतिक, व असअलुक मिन फ़ज़्लिकल-अज़ीम, फ़-इन्नक तक़्दिरु व ला अक़्दिर, व तअलमु व ला अअलम, व अन्त अल्लामुल-ग़ुयूब. अल्लाहुम्म इन कुन्त तअलमु अन्न हाज़ल-अम्र ख़ैरुन ली फ़ी दीनी व मआशी व आक़िबति अम्री फ़-क़्दुर्हु ली व यस्सिर्हु ली सुम्म बारिक ली फ़ीह, व इन कुन्त तअलमु अन्नहु शर्रुन ली फ़-स्रिफ़्हु अन्नी व-स्रिफ़्नी अन्ह, व-क़्दुर लियल-ख़ैर हैसु कान, सुम्म रज़्ज़िनी बिह
Allāhumma innī astakhīruka bi-‘ilmik, wa astaqdiruka bi-qudratik, wa as’aluka min faḍlikal-‘aẓīm, fa-innaka taqdiru wa lā aqdir, wa ta‘lamu wa lā a‘lam, wa Anta ‘allāmul-ghuyūb. Allāhumma in kunta ta‘lamu anna hādhal-amra khayrun lī fī dīnī wa ma‘āshī wa ‘āqibati amrī faqdur-hu lī wa yassir-hu lī thumma bārik lī fīh, wa in kunta ta‘lamu annahū sharrun lī faṣrif-hu ‘annī waṣrifnī ‘anh, waqdur liyal-khayra ḥaythu kān, thumma raḍḍinī bih
ऐ अल्लाह, मैं तेरे इल्म के ज़रिए तुझसे ख़ैर तलब करता हूँ, और तेरी क़ुदरत के ज़रिए तुझसे ताक़त माँगता हूँ, और तुझसे तेरे अज़ीम फ़ज़्ल का सवाल करता हूँ — क्योंकि तू क़ुदरत रखता है और मैं क़ुदरत नहीं रखता, तू जानता है और मैं नहीं जानता, और तू तमाम छुपी बातों का ख़ूब जानने वाला है। ऐ अल्लाह, अगर तू जानता है कि यह काम मेरे लिए मेरे दीन, मेरी मआश और मेरे अंजाम-ए-कार में बेहतर है, तो इसे मेरे लिए मुक़द्दर कर दे, इसे मेरे लिए आसान कर दे, फिर इसमें मेरे लिए बरकत दे। और अगर तू जानता है कि यह मेरे लिए बुरा है, तो इसे मुझसे फेर दे और मुझे इससे फेर दे, और मेरे लिए भलाई मुक़द्दर कर दे जहाँ भी वह हो, फिर मुझे उस पर राज़ी कर दे।
बुख़ारी · सहीह — जहाँ हाज़ल-अम्र आता है, वहाँ अपने काम का नाम लें।
तहज्जुद के लिए उठने पर
1×
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ، اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي، وَارْحَمْنِي، وَاهْدِنِي، وَعَافِنِي، وَارْزُقْنِي
ला इलाह इल्ला अन्त सुब्हानक, अल्लाहुम्म-ग़्फ़िर ली ज़न्बी, व-र्हम्नी, व-ह्दिनी, व आफ़िनी, व-र्ज़ुक़्नी
Lā ilāha illā Anta subḥānak, Allāhummaghfir lī dhanbī, warḥamnī, wahdinī, wa ‘āfinī, warzuqnī
तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है। ऐ अल्लाह, मेरा गुनाह बख़्श दे, मुझ पर रहम फ़रमा, मुझे हिदायत दे, मुझे आफ़ियत दे, और मुझे रोज़ी दे।
अबू दाऊद · सहीह (अल्बानी) — रात में जागने पर कही जाती है; रात का तिहाई हिस्सा वह वक़्त है जब रब नुज़ूल फ़रमाता है और दुआ क़बूल करता है (बुख़ारी, मुस्लिम)।
मय्यत पर (जनाज़ा)
3री तकबीर के बाद
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ وَاغْسِلْهُ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ وَنَقِّهِ مِنَ الْخَطَايَا كَمَا نَقَّيْتَ الثَّوْبَ الأَبْيَضَ مِنَ الدَّنَسِ وَأَبْدِلْهُ دَارًا خَيْرًا مِنْ دَارِهِ وَأَهْلاً خَيْرًا مِنْ أَهْلِهِ وَزَوْجًا خَيْرًا مِنْ زَوْجِهِ وَأَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ وَأَعِذْهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ أَوْ مِنْ عَذَابِ النَّارِ
अल्लाहुम्म-ग़्फ़िर लहु व-र्हम्हु व आफ़िहि व-अफ़ु अन्हु व अक्रिम नुज़ुलहु व वस्सिअ मुद्ख़लहु व-ग़्सिल्हु बिल-माइ वस-सल्जि वल-बरदि व नक़्क़िहि मिनल-ख़ताया कमा नक़्क़ैतस-सौबल-अब्यज़ मिनद-दनसि व अब्दिल्हु दारन ख़ैरन मिन दारिहि व अह्लन ख़ैरन मिन अह्लिहि व ज़ौजन ख़ैरन मिन ज़ौजिहि व अद्ख़िल्हुल-जन्नत व अइज़्हु मिन अज़ाबिल-क़ब्रि औ मिन अज़ाबिन-नार
पूरी रिवायत

Jubair b. Nufair says:I heard it from 'Auf b. Malik that the Prophet (ﷺ) said prayer on the dead body, and I remembered his prayer:" O Allah! forgive him, have mercy upon him, give him peace and absolve him. Receive him with honour and make his grave spacious; wash him with water, snow and hail. Cleanse him from faults as Thou wouldst cleanse a white garment from impurity. Requite him with an abode more excellent than his abode, with a family better than his family, and with a mate better than his mate. Admit him to the Garden, and protect him from the torment of the grave and the torment of the Fire." ('Auf bin Malik) said: I earnestly desired that I were this dead body

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 2232 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

Allāhummaghfir lahu warḥamh, wa ‘āfihi wa‘fu ‘anh, wa akrim nuzulah, wa wassi‘ mudkhalah, waghsilhu bil-mā’i wath-thalji wal-barad
ऐ अल्लाह, इसे बख़्श दे और इस पर रहम फ़रमा, इसे आफ़ियत दे और इसे माफ़ कर दे, इसकी मेहमानी इज़्ज़त के साथ फ़रमा, इसके दाख़िल होने की जगह को कुशादा कर दे, और इसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे।
मुस्लिम · सहीह — पहली तकबीर के बाद अल-फ़ातिहा, दूसरी के बाद दुरूद, तीसरी के बाद यह, चौथी के बाद सलाम।
एक नज़र में गिनती
•नमाज़ से पहले: अज़ान की दुआ, मस्जिद की दुआ, सना — हिस्सा 1।
•नमाज़ के अंदर: रकअत का ज़िक्र, फिर सलाम से पहले A और B। हर फ़र्ज़ के बाद: नंबर 1–11, तरतीब से।
•तस्बीह: 33 + 33 + 33, फिर नंबर 3 की तहलील एक बार — 100।
•तीनों सूरतें: हर एक एक बार; फ़ज्र और मग़रिब के बाद हर एक तीन बार।
•फ़ज्र और मग़रिब में इज़ाफ़ा: युहयी व युमीत वाली तहलील 10×, और अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन-नार 7×।
•फ़ज्र में यह भी: नफ़ा देने वाले इल्म, अच्छी रोज़ी और क़बूल होने वाले आमाल की दुआ।
•इशा: आम तरतीब, फिर वित्र — अंदर क़ुनूत, बाद में सुब्हानल-मलिकिल-क़ुद्दूस 3× — फिर सोने के वक़्त के अज़कार।
•जुमा: कोई अलग अल्फ़ाज़ नहीं — वही आम तरतीब। ग़ुस्ल, ख़ुशबू, जल्दी पहुँचना, ख़ुत्बे के दौरान ख़ामोशी, सूरह अल-कह्फ़, कसरत से दुरूद, और मग़रिब से पहले की आख़िरी घड़ी में क़बूलियत की घड़ी तलाश करना।
अमल के बारे में तीन नोट
•आप ﷺ सलाम के बाद सिर्फ़ उतनी देर क़िबला-रुख़ रहते जितनी देर में अल्लाहुम्मा अन्तस-सलाम… कहा जाए, फिर जमाअत की तरफ़ रुख़ कर लेते (मुस्लिम)।
•जब लोग फ़र्ज़ नमाज़ से फ़ारिग़ होते, तो ज़िक्र में आवाज़ बुलंद करना आपके ज़माने में मारूफ़ था (बुख़ारी, मुस्लिम) — मगर हर एक के अपने ज़िक्र के तौर पर, इमाम के पीछे एक आवाज़ में मिलकर पढ़े जाने वाले ज़िक्र के तौर पर नहीं।
•गिनती दाएँ हाथ की उँगलियों पर की जाती है; आप ﷺ ने इसकी हिदायत दी और फ़रमाया कि उँगलियों से पूछा जाएगा और उन्हें बुलवाया जाएगा (अबू दाऊद, तिर्मिज़ी)।
पिछले वर्शन में जो जोड़ा गया
•इब्न अज़-ज़ुबैर की तहलील (4) — मुस्लिम, सहीह। हर नमाज़ के लिए रिवायत हुई; फ़र्ज़ के बाद की सबसे मज़बूत रिवायतों में से एक, और यह बिल्कुल ग़ायब थी।
•सअद की पाँच चीज़ों से पनाह (5) — बुख़ारी, सहीह। साफ़ तौर पर दुबुर अस-सलवात; सअद ने इसे अपने बेटों को नमाज़ के बाद के मुस्तक़िल अमल के तौर पर सिखाया।
•चार चीज़ों से पनाह + अबू बक्र की दुआ (A, B) — मुस्लिम / बुख़ारी और मुस्लिम, सहीह। सलाम से पहले का हुक्म दिया गया; अक्सर ग़लती से उसके बाद रख दी जाती हैं।
•वित्र के बाद सुब्हानल-मलिकिल-क़ुद्दूस — नसाई और अबू दाऊद, सहीह। हनफ़ी मज़हब में वित्र वाजिब है; इसके आख़िर का ज़िक्र मौजूद नहीं था।
जान-बूझकर नहीं जोड़ा गया। जुमे के बाद तीनों सूरतें सात-सात बार, फ़र्ज़ के बाद के ज़िक्र के तौर पर अल-हश्र की आख़िरी तीन आयतें, और तंगदस्ती के ख़िलाफ़ सूरह अल-वाक़िआ बहुत आम हैं, लेकिन इनकी रिवायतें ज़ईफ़ हैं या ये साबितशुदा सुन्नत के बजाय बाद की नस्लों के मामूलात हैं। इस शीट में सिर्फ़ वही है जिसकी सनद मुस्तनद है।
स्रोत सहीह बुख़ारी · सहीह मुस्लिम · सुनन अबू दाऊद · सुनन नसाई · सुनन इब्न माजा · जामे तिर्मिज़ी · मुसनद अहमद। सुनन की किताबों के दर्जे अल्बानी के मुताबिक़ हैं, सिवाय इसके कि कुछ और बताया गया हो। अपनी अदायगी किसी क़ाबिल उस्ताद से जँचवा लें — लिखा हुआ तलफ़्फ़ुज़ तजवीद अदा नहीं कर सकता।

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।

इस भाषा में लाइब्रेरी इंटरनेशनल एडिशन के एक ड्राफ़्ट तर्जुमे में पढ़ी जाती है। इसे मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसकी जाँच नहीं की है। स्रोत अरबी है; अंग्रेज़ी उसके साथ दिखाई जा सकती है। जहाँ कोई टाइटल क़ुरआन की आयत नक़ल करता है, वहाँ दिखाया गया मतलब एक पब्लिश हो चुके एडिशन, Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari (QuranEnc.com), के अल्फ़ाज़ हैं, ड्राफ़्ट नहीं।

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